FII Full Form In Hindi | FII की पूरी जानकारी

FII Full Form In Hindi

आप आये दिनों समाचार, न्यूज़ पेपर  इत्यादि में हमेशा  सुनते रहते होगे की FII कौन होते है और इनका काम  क्या होता है तथा इनका हमारे  देश की बढती  अर्थव्यवस्था में रोल क्या है  ।  यदि आप ऐसे सवालों का जवाब जानना चाहते है तो यह आर्टिकल आपके  लिए काफी हेल्पफुल होगा ! आइये हम इस पर विस्तृत रूप से  चर्चा करते है  ।  

वैसे भारत जैसे विकासशील देशों में इस तरह  के शब्द काफी प्रयोग किये जाते है और  भारत के वित्तीय बाजारों में निवेश करने वाली बाहरी कंपनियों को संदर्भित करता है ।  

FII का फुल फॉर्म 

FII का फुल फॉर्म , (Foreign Institutional Investor) मतलब विदेशी संस्थागत निवेशक होता है!

FII Full Form In Hindi
FII Full Form In Hindi

FII का अर्थ 

वे निवेश   को कहते जो अपने देश से धन इकट्ठा कर दुसरे देशो के शेयर बाजार में लगाते या इन्वेस्टमेंट करते है  इसमे निवेशक  के रूप में सामान्य लोग से ले कर के बड़े से बड़े लोग या व्यापारी  हो सकते है जो किसी देश की शेयर बाजार, बैंकिंग , बीमा और पेंशन आदि में निवेश करते है । 

FII का  प्रभाव हमारे अर्थव्यवस्था पर 

इनके निवेश का सीधा असर हमारे देश के अर्थव्यवस्था  पर पड़ता है यदि कोई निवेशक भारी मात्रा में किसी देश की शेयर बाजार या अन्य क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट या निवेश करता है तो उस देश का शेयर बाजार का  ऊपर की तरफ बदने की प्रवृति  होती है । 

हम आसान शब्दों में कहे तो उस देश का शेयर बाजार ऊपर चड़ने लगता है और इससे देश की अर्थव्यवस्था सीधा प्रभावित होता है । 

ये सारे संस्थागत निवेशक भिन्न- भिन्न देशों से सम्बन्ध रखते है अर्थात सभी निवेशक विदेशी होते है ।  और इनका शेयर विश्व लेवल पर होता है  ये दुनिया के अनेक देशो की शेयर  बाजार में निवेश करते है और एकत्रित धन  को एफआईआई  अपनी कार्यनीति के अनुसार शेयर बाजार की विविध प्रतिभूतियों में निवेश कर के उस पर लाभ कमाते है, और उसका हिस्सा अपने ग्राहकों पहुचाते है । 

इन लोगो के पास धन काफी  मात्र में होता है  इसलिए ये लोग क्रय – विक्रय भी बड़े लेवल पर करते है और इसका सीधा प्रभाव शेयर मार्केट के चल पर पड़ता है ।  

 FII बनने की प्रोसेस   

किसी भी व्यक्ति को यदि FII बनना है तो सबसे पहले उसे भारतीये प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (securities and Exchange Board of India- SEBI) में तथा भारतीये रिजर्व  बैंक में पंजीकरण करवाने परता है साथ साथ इसके नियमो को पालन करनी पड़ती है । 

वर्तमान समय में सेबी के पास 1100 से अधिक एफआईआर पंजीकृत है । 

भारतीय company जहाँ FII की holding बहुत मजबूत है । 
  1. ग्रीव्स कॉटन – 115 प्रतिशत 
  2. आरती इंडस्ट्रीज – 103  प्रतिशत
  3. मिश्र धातु निगम – 5700  प्रतिशत 
  4. एक्स्त्राजेनेका  फॉर्म इंडिया – 382 प्रतिशत
  5. एल &टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज -171 प्रतिशत 
  6. ए यू स्मॉल फाइनेंस बैंक -141 प्रतिशत 
  7. एस्टर डीएम हेल्थकेयर – 116 प्रतिशत
भारतीय कंपनी जहाँ 50 प्रतिशत से ज्यादा FII की भागीदारी है 
कोल इंडिया66 प्रतिशत
एंडुरेंस टेक्नोलॉजी66 प्रतिशत
ट्राई डेंट66 प्रतिशत
उषा मेटिंग51 प्रतिशत
वैभव ग्लोबल52 प्रतिशत
ग्रैन्यूल्स  इंडिया63 प्रतिशत
बाटा इंडिया78 प्रतिशत
FII  का  वर्चस्व 

वर्तमान समय में इसका प्रभाव काफी ज्यादा है ! ऐसा लगता है की FII ही शेयर बाजार को चलते है आप कह सकते है की FII शेयर बाजार का आत्मा है ! 

2008 का अमेरिकन आर्थिक मंदी 

जब अमेरिका में  आर्थिक  मंदी आई थी तो उस समय पूरा विश्व उस आर्थिक मंदी से प्रभावित हुआ था विश्व के अनेक देशो की शेयर गिराने लगी थी  और यदि इंडिया की बात करे तो यहाँ भी शेयर गिरे थे क्योकि यहाँ अधिकांश निवेशक विदेशी थे  और वे सब अपना शेयर भारत के शेयर मार्केट से निकलने लगे थे ! 

महत्वपूर्ण बातें FII के बारे में 
  •  एक विदेशी संस्थागत  निवेशक अपने आधिकारिक घरेलु देश  के बाहर , वित्तीय बाजार में एक निवेश होता है 
  • विदेशी संस्थागत  निवेशक पेंशन, फंड  निवेश बैंक , हेज फंड  और म्युचुअल फंड शामिल कर सकते है ! 
  •  कुछ  देश  विदेशी निवेश के निवेश आकार पर प्रतिबंध  लगाया है ! 
भारत  में निवेश करने की प्रक्रिया 

एफआईआई  को केवल देश की पोर्टफोलियो  निवेश योजना के माध्यम से भारत के प्राथमिक और द्वितीयक पूंजी बाजारों में निवेश करने की अनुमति है ! यह योजना एफआईआई  को देश के सार्वजनिक एक्सचेंज पर भारतीयों कंपनियों के शेयर और डिबेंचर खरीदने की अनुमति है !

हालांकि कई नियम है उदाहरण के लिए एफआईआई  आमतौर पर निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय कंपनी के भुगतान योग्य पूंजी के 24 प्रतिशत के अधिकतम निवेश तक सीमित होते है । 

फिर भी एफआईआई  24 प्रतिशत से अधिक निवेश कर सकता है  यदि निवेश को कंपनी के बोर्ड द्वारा स्वीकृत है है !

 पर एफआईआर के निवेश  की सीमा , बैंक का पेड़- अप पूँजी  का केवल 20 प्रतिशत  है । 

भारतीय रिजर्व बैंक  अधिकतम निवेश से कट ऑफ़ अंक 2% कम कर के दैनिक रूप से इस सीमओं के अनुपालन की निगरानी करता है !

अंतिम 2% खरीदने की अनुमति देने से पहले निवेश प्राप्त करने वाली भारतीयों कंपनियों की सावधानी बरतने की मौका मिलता है ! 

चीन में विदेशी  संस्थागत  निवेशक 

चीन में विदेशी संस्थानों  के लिए एक लोकप्रिय स्थान है जो उच्च विकास पूंजी वाले बाजार में किया जाता है  2019 में  चीन राष्ट्रों के निवेश और ब्रांड की राशि पर कोटा स्क्रैप  करने का फैसला किया !

मुख्य रूप से इसका उद्देश्य बाहरी निवेशकों को आकर्षित करना था ! क्यूकि उस समय चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ गई थी और अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध चल रहा था ! 

विदेशी संस्थागत निवेशको का उदहारण   

प्रायः FII विदेशी होते है ! उनमें से भी ज्यादा अमेरिकी और चीनी लोग होते है  आपको मै दू की भारत में भी ज्यादा FII विदेशी है ! इसका अंदाजा  आप 2008 में आये अमेरिका आर्थिक संकट से लगा सकते है ! अमेरिकन अर्थव्यवस्था के साथ साथ उस समय  भारत के अर्थव्यवस्था की भी कमर टूट गया था ! यहाँ के शेयर बाजारों का दिवालिया निकालने लगा था ! 

निष्कर्ष

हमने FII पर लिखने का प्रयास किया है यदि आपको इसमें कुछ त्रुटि नजर ए तो आप कमेंट बॉक्स में जरुर बताये । 

अन्य उपयोगी फुल फॉर्म विषय हिंदी में :-

  1. PIN Full Form
  2. UPI Full Form
  3. NCB Full Form
  4. Full Form FIFA

Leave a Reply