DPT का फुल फॉर्म क्या है? | DPT परिभाषा और अर्थ

DPT 

आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे की dpt का फुलफॉर्म क्या हैं, dpt क्या होता हैं । बहुत से लोगों को dpt का ज्ञान नहीं होता इशी लिए आज ये आर्टिकल उन सभी लोगों को dpt के बारे मे बताने के लिए हुआ हैं । इस आर्टिकल को पूरा पढे ताकि आपको dpt के बारे मे सब कुछ पता चल पाए । 

DPT का फुलफॉर्म क्या हैं? 

सबसे पहले dpt का फुलफॉर्म जानते हैं ताकि इसके बारे मे ज्यादा अच्छे से जानकारी मिल सके । dpt का फुलफॉर्म Diphtheria, Pertussis, Tetanus होता हैं । 

DPT क्या हैं? 

डीपीटी का टीका शिशु को दिया जाता हैं, ताकि उसे 3 भयानक संक्रमण से बचाया जा सके । इस टीके मे रोग से लड़ने की ताकत मिलती हैं । जानलेवा बीमारोयो से शिशु को बचाता हैं । 

जैसे की हमे पता हैं dpt के तीन अलग अलग मतलब हैं जो बीमारियों से लड़ने मे मदद करती हैं, उसमे Diphtheria मे बच्चों को संस लेने मे समस्या होती हैं, और Pertussis मे शिशु को खाने पीने और संस लेने मे समस्या होती हैं । वही अगर बात करे की Tetanus मे क्या होता हैं, तो हम देखते हैं की इसके प्रभाव से तांत्रिक यंत्र को प्रभावित करता हैं । 

अगर हम इन का टीका  बच्चों को नहीं दे तो बहुत सारी बीमारिया को खतरा बना रहता हैं, जैसे – निमोनिया, मानशीक बीमारी, मिर्गी आदि बीमारिया शिशु मे होती हैं । 

DPT का फुल फॉर्म क्या है?
DPT का फुल फॉर्म क्या है?

DPT का तिक क्या हैं? 

डीपीटी एक वैक्सीन हैं जो की बच्चों को दिया जाता हैं ताकि वो बीमारियों से लड़ सके । इसमे 7 साल तक के बच्चों को Diphtheria, Pertussis, Tetanus दिया जाता हैं ताकि वो बीमारियों से बच सके । इसके बाद किशोर अवस्था मे इसी का विकसित बूस्टर वैक्सीन दिया जाता हैं । 

DPT को हम  (Tdap) भी कहते हैं । जो की 11 साल के बच्चों को दिया जाता हैं । मुख्याता इसे हम रोगों से लड़ने के लिए ही इस्तेमाल करते हैं । 

Diphtheria – इसकी वजह से कुछ बीमारिया होती हैं जैसे – लकवा, हार्ट फैल्यर, और संस लेने मे समस्या । 

Tetanus – इसमे शरीर के तांत्रिक तंत्र को नुकसान पहुचती हैं, जिससे मांशपेसिया सिकुरने लगती हैं, जिसके बाद बहुत ज्यादा दर्द होता हैं । Tetanus ज्यादा तर गर्दन और जब्रो को नुकसान पहुचाता हैं, जिसके बाद ठीक से खाना ओर निगलना मुस्किल होता हैं । 

Pertussis – इसे हम आम तोड़ पे काली खासी के नाम से जानते हैं । इसकी वजह से शिशु मे खाने पीने और संस लेने मे समस्या होती हैं । इसके साथ साथ बच्चों मे काली खासी के साथ मिर्गी, निमोनिया और मांशीक छति भी होता हैं । यह भी देखा गया हैं की इन समस्या से बच्चों के प्राण भी चले जाते हैं । 

DPT के प्रकार 

DPT मुख्याता 2 प्रकार के होते हैं । 

  • DTap
  • DTwP

इन दोनों मे ही bectria की मात्र अलग अलग होती हैं । DTwP को बनाने मे Pertussis bectria के कोसिकायों का इस्तेमाल किया जाता हैं । जब की DTap को बनाते वक्त इस becteria के कुछ हीसे को इस्तेमाल किया जाता हैं । 

अलग अलग तरह से बनाने की वजह से इसका असर शिशु पर अलग अलग होता हैं । 

इसके अलावा DTap को कम दर्द वाली और DTwP को अधिक दर्द वाली दावा के नाम से भी जाना जाता हैं । DTap मे दर्द कम होता हैं और साथ साथ इसके side effects भी कम होते हैं । 

लेकिन कुछ बातों मे DTwP को बेहतर बताया गया हैं, DTwP ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती हैं DTap के मुकाबले, हलकी DTwP का असर ज्यादा होता हैं मगर इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाता हैं शिशु को सुरक्षा पहुचाने मे । 

DPT का टीका कब लगाना चाहिए? 

डीपीटी का टीका लगाने की समय के बारे मे जानने के लिए नीचे दिए गए बिन्दुवों को पढे – 

  • 2 महीने 
  • 4 महीने 
  • 6 महीने 
  • 15-18 महीने 
  • 4-6 साल 

किशोर अवस्था मे इसका अलग समय होता हैं । 

11-12 साल जब इन्हे DPT बूस्टर दिया जाता हैं । इसके बाद हर 10 साल मे एक खुराक लेने के जरूरत पड़ती हैं । 

DPT किन शिशु को नहीं देना चाहिए । 

डीपीटी का टीका 7 साल से कम बच्चों को दिया जाता है । लेकिन ये सभी बच्चों पर सामान्य असर नहीं करता । कुछ बच्चों को इसका केवल Diphtheria, Pertussis,ही  दिया जाता है । 

ये कुछ पॉइंट के माध्यम से बताया गया है की किन शिशु को इसका टीका नहीं लगना चाहिए । 

  • 6 सप्ताह का नहीं हुआ है तो इसका तिक नहीं लग सकता । 
  • अगर शिशु को पहली खुराक से एलर्जी हुई हो तो नहीं दिया जा सकता । 
  • अगर पिछली खुराक के कारण शिशु को दोड़ा पड़ा हो या कोई और समस्या हुई हो तोह । 
  • पिछली खुराक से दर्द या सूजन हुई हो तो इसका टीका नहीं लगाया जा सकता । 

अगर इन जैसी कोई भी समस्या हुई हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले । और डॉक्टर के सलाह के बाद ही अन्य टीका लगाने पर विचार करें  । 

DPT के साइड effects क्या हैं? 

कुछ पॉइंट्स के माध्यम से इसके साइड effects को बताया गया है – 

  • लालिमा और सूजन होना, इंजेक्शन के बाद 
  • इंजेक्शन की जगह पर छूने पर दर्द होना । 
  • इंजेक्शन लगने पर शिशु को बुखार या उल्टी होना । 
  • 4-5 खुराक के बाद बच्चे के शरीर में सूजन होना । 
  • बहुत ज्यादा दुर्लभ समस्या में शिशु को मानसिक छति भी होती हैं । 
dpt के दूसरे फुलफॉर्म 
Doctor Of Physical TherapyDynamic Packet Transport
Democratic Party Of TurkmenistanDruk Phuensum Tshogpa
DipropyltryptamineDial Pulse Terminate
Double Protective TreatmentDemand For Public Transport
Defensive Petroleum TransferDepartment Of Particle Theory
Dirty Page TableDoctorate In Physical Therapy 
Day Past TransferDistance Per Tile
Department Of Parking And TrafficDepartment Of Physical Therapy
Divinely Professional TherapistDead Pixel Tester

ये कुछ बैट थी dpt को लेकर आशा है आपको समझ आया होगा । बेहतर सुझाव और सलाह के लिए comment जरूर करे । 

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